About Me

My photo
कुछ तो मजबूरिय रही होगी वरना यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता.............?

Sunday, 9 October 2011


मुझे अफ़सोस नहीं इसका..
की मैं राह हूं केवल…
किसी की मंज़िल नहीं…
गम है तो बस इतना की…
भूल जाते हैं राहें लोग…
मुझे अफ़सोस नहीं इसका..
की मैं साथी हूं केवल..
किसी की ज़िंदगी में शामिल नहीं..
गम है तो बस इतना..
साथ छोङ देते हैं लोग..
मुझे अफ़सोस नहीं इसका…
की मैं गुजरा पल हूं केवल..
जिसे तमाम उम्र हासिल नहीं..
गम है तो बस इतना..
गुजरा वक्त भूला देते हैं लोग…
“किसी और से नहीं पर खुद से गिला है मुझको,
शायद खुद मेरी वजह से मेरी ज़िन्दगी छोङ गई मुझको।”

मुझे अफ़सोस नहीं इसका..
की मैं राह हूं केवल…
किसी की मंज़िल नहीं…
गम है तो बस इतना की…
भूल जाते हैं राहें लोग…
मुझे अफ़सोस नहीं इसका..
की मैं साथी हूं केवल..
किसी की ज़िंदगी में शामिल नहीं..
गम है तो बस इतना..
साथ छोङ देते हैं लोग..
मुझे अफ़सोस नहीं इसका…
की मैं गुजरा पल हूं केवल..
जिसे तमाम उम्र हासिल नहीं..
गम है तो बस इतना..
गुजरा वक्त भूला देते हैं लोग…

“किसी और से नहीं पर खुद से गिला है मुझको, शायद खुद मेरी वजह से मेरी ज़िन्दगी छोङ गई मुझको
                                                                                          " निर्मोही "

Thursday, 8 September 2011

यु तो आंसू


जलाते  है  हम
अपने  दिल  को  दीये की  तरह ..
तेरी  ज़िन्दगी  में 
खुशियों  की  रौशनी  लाने  के  लिए
सह  जाते  है  हर  चुभन  को
अपने  पैरों  तले
तेरी  राहों  में  फूल  बिछाने   के  लिए ..`
यूँ  दूर  रहकर
दूरियों  को  बढाया  नहीं  करते ,
अपने  दीवानों  को यु  सताया
नहीं  करते ,
हर  वक़्त  बस  जिसे  तुम्हारा  ख्याल  हो ,
उसे  अपनी...
आवाज़  के  लिए  तरपाया   नहीं  करते ..
यकीन हर  रिश्ते  की
बुनियाद  होती  हैं  ,
                       जो ,टूट  जाए  अगर 
तो  जुड़ना  मुश्किल  होता  हैं  ,
कहना  आसान  हैं  हमें
यकीन नहीं  हैं  तुमपे ,
लेकिन  दर्द ...
 इसका  बेपनाह  होता  हैं .
यु तो आंसू  को बहुत समझाया
तन्हाई  में  आया  करो ,
महफ़िल  में  हमारा  मजाक  न  उराया  करो ,
                                                            इसपर  आंसू  तड़प  कर  बोला ,
भरी  महफ़िल  में  आपका  दिल  अकेला  न  रहे ,
तो ये अब ये भी तुम्हारे है
इतना  बस  इन्हें  समझाया  करो ..
`
गम  में  हसने  वालो को  कभी  रुलाया  नहीं  जाता ,
लहरों  से  पानी  को  कभी  हटाया  नहीं  जाता ,
होने  वाले  हो  जाते  हैं   खुद  ही  दिल  से  अपने  ,
किसीको  कहकर  अपना  बनाया  नही  जाता ……,
                                                              "निर्मोही"


जिस्म सीली लकड़ी जैसे सुलग रहा है
अपनी जली रूह की राख उड़ा कर
रुख हवाओ का दिखा रहा हू

फिर एक नयी चिता जला रहा हू


आज कुछ खुवाब बोए है कागज़ पर
कोशिश है नज्मो को बा - तरतीब करने की
किये जा रहा हू


फिर एक नयी चिता जला रहा हू


कुछ रह गया जो साथ न गया तुम्हारे
दिल की दराजों को फिर से खंगाल कर
आज वोह सामान निकाल रहा हू


फिर एक नयी चिता जला रहा हू


कुछ लम्हे टंगे है मेरे कमरे की दीवार पर
वक़्त की धूल सी जम गई है उन पर
उन्हे उतार रहा हू


फिर एक नयी चिता जला रहा हू


थोड़ी सी खताए रखी है अलमारी के ऊपर
सजाए पता नहीं कब तक आयेगी
एक ज़माने से इंतजार कर रहा हू


फिर एक नयी चिता जला रहा हू
                                           "निर्मोही"

Monday, 5 September 2011

"आवारापन "
ढूंढता रहा सुख ,,
मिले बस गम .....एक लम्बी तलाश  ...
फिर तुम मिले ,,
जैसे जिन्दगी मिली थी ...
फिर अहसास कराया तुमने 
प्यार में दर्द क्या होता है ...
चैन क्या होता है ,,
अब जाके जीवन  की
सबसे गहरी नींद आएगी ..
अब जाके जिस्म को चैन आएगा .....
                                   "निर्मोही"

Sunday, 4 September 2011

क्या तुमको ये
अहसास है की तुम इस 
दिल के लिय कितने खास हो....
यकीन न हो तो
 करीब आकर देख लेते तुम्हारे बिना
 ये दिल हर पल कितना उदास है ..
वो दूर रहने वाले
 इतना तो याद कर लिया होता 
एक प्यार भरा पैगाम ही भिजवा दिया होता .
कैसे जीते है
तुम्हारी यादो में मर मर कर  
एक  बार आकर 
हाल पूछ तो लिया होता ..
जल रहा है दिल ..
कभी आके इसपे आपने
शितल मोती तो बरसाया होता....
पर शायद हो न सके .
इस दिल को जलना है ...तेरी याद में ..
तेरी मोहब्बत में  
                      "निर्मोही"
 

Saturday, 3 September 2011


                         

आप ने 
दिन रात मुझको सताया इतना 
की आपसे नफरत भी हो गई 
और मोहब्बत भी हो गई 
 आपने इस नजाकत से                                                         
चूमा 
 मेरे होठो को था 
की रोजा भी था टूटा  
और अफ्तारी भी थी हो गई ..
 
 आपने इस तरह से 
मुझसे मोहब्बत थी की गुनाह भी न
 हुआ था ,और इबादत भी थी हो गई ..
मत पूछो आपके
 प्यार करने का अंदाज कैसा था ...
आपने था शिद्दत से
 सीने से यु लगाया ..की मौत भी न हुई
 और जन्नत थी भी मिल गई.......  

                     .                     ''निर्मोही"

Friday, 2 September 2011

"निर्मोही"

जिन्दगी को आज रुसवा होने का डर  है...........
थमी हुई जिन्दगी में तूफान के मचल जाने का डर है.......
अभी तक तो जीने की बस कोशीस ही करते थे ....
अब हर कोशिश के नाकाम होने का डर है.......
                                                          काश कभी उनको ये चुभ न पाए.
                                                                      जिनके लिय रातो में जग-जग के अपने को तरपाया............
                                                                       उनके दिल को कभी इसकी आहट  भी न हो पाया    .........

आज जब उनको आरज़ू भी जुदा हो गई हमसे ...
खुदा करे उन्हें अब कभी शक्ल भी न दिखाये......
हम कांटे ठहरे उनके गुलशन के..
सो इस दुनिया से जुदा हो जाने का डर है .....
                                                               जैसे 
                                                                        "निर्मोही"

तेरी मोहब्बत में

मेरे महबूब ......
सारी उम्र ,हर कदम पर मिले.
तुम्हारी मोह्हबत ,
अहसास की रंगों से महकते 
जैसे सुर्ख गुलाब के फूल ....
 धुप से तपती रहो में
छाये ठंढी छावं सी
जैसे पीले अमलतास के फूल .....
 गोरी हथेलियों पर आके सज जाये 
इन्द्रधनुषी सपने संजोये इन आँखों में 
जैसे खुशरंग मेहंदी के महकते फूल.......
  छनछनाती चांदनी रातो में 
बिछ जाते है बिस्तर ख्वाहिशे के जैसे 
      महकते है बेला के खिलते फूल ......
               मेरे महबूब 
     हर उम्र ,हर कदम पर मिले ..........
                    " तुम्हारी मोह्हबत के फूल"
                                                     "निर्मोही"     

Sunday, 28 August 2011

मेरे महबूब 
मुझे आज भी यद् है
वो लम्हे 
जब तुमने कहा था -
तुम्हारी नज्मे 
लेवल एक नज्म नहीं है 
ये तो किताबे -इश्क़ की 
पाक नियामते है .....
जिन्हें मैंने आज महसूस करने लगा हूँ..
तुम्हारा हर एक लब्ज खुद ही
किसी दीवाने दिल की पाक कलामे -इलाही है..
जिसे मई एक कलमे की तरह
हमेशा पढ़ते उसमे खोते रहना चाहता हु...
                                  'निर्मोही '

मेरी रूह भी महक रही है तुम्हारी मोहब्बत से .......

मेरे महबूब ......
मोहबत के शहर की 
जमी का वो टुकरा 
आज भी यादो की  खुसबू  से महक रहा है 
जहाँ 
मैंने सुर्ख गुलाबो की 
महकती पंखुरियो को 
तुम्हारे कदमो में बिछाया था....
तुमने कहा था -
यह फूल कदमो में बिछाने के लिय नहीं  है....
तुम्हारे बालो में सजाने के लिय है...
फिर तुमने 
खुले बालो में 
सुर्ख गुलाब लगते हुए कहा था -
आई लव यूं ...
तब से बल ही नहीं 
मेरी रूह भी महक रही है 
तुम्हारी मोहब्बत से .......


Saturday, 13 August 2011

nirmohi


दीवाना -दिल


हँवा के पारो पे लिखा है मैंने दीवाने दिल का फशाना .......................?
तुम ने पढ़ा की नहीं जाने जाना ...........................?
                                                     


                                                      रूपेश "र्निमोही,,