About Me
- Nirmohi
- कुछ तो मजबूरिय रही होगी वरना यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता.............?
Thursday, 8 September 2011
यु तो आंसू
जलाते है हम
अपने दिल को दीये की तरह ..
तेरी ज़िन्दगी में
खुशियों की रौशनी लाने के लिए
सह जाते है हर चुभन को
सह जाते है हर चुभन को
अपने पैरों तले
तेरी राहों में फूल बिछाने के लिए ..`
यूँ दूर रहकर
तेरी राहों में फूल बिछाने के लिए ..`
यूँ दूर रहकर
दूरियों को बढाया नहीं करते ,
अपने दीवानों को यु सताया
अपने दीवानों को यु सताया
नहीं करते ,
हर वक़्त बस जिसे तुम्हारा ख्याल हो ,
उसे अपनी...
हर वक़्त बस जिसे तुम्हारा ख्याल हो ,
उसे अपनी...
आवाज़ के लिए तरपाया नहीं करते ..
यकीन हर रिश्ते की
यकीन हर रिश्ते की
बुनियाद होती हैं ,
जो ,टूट जाए अगर
तो जुड़ना मुश्किल होता हैं ,
कहना आसान हैं हमें
कहना आसान हैं हमें
यकीन नहीं हैं तुमपे ,
लेकिन दर्द ...
इसका बेपनाह होता हैं .
यु तो आंसू को बहुत समझाया
यु तो आंसू को बहुत समझाया
तन्हाई में आया करो ,
महफ़िल में हमारा मजाक न उराया करो ,
महफ़िल में हमारा मजाक न उराया करो ,
इसपर आंसू तड़प कर बोला ,
भरी महफ़िल में आपका दिल अकेला न रहे ,
भरी महफ़िल में आपका दिल अकेला न रहे ,
तो ये अब ये भी तुम्हारे है
इतना बस इन्हें समझाया करो ..
`
गम में हसने वालो को कभी रुलाया नहीं जाता ,
लहरों से पानी को कभी हटाया नहीं जाता ,
होने वाले हो जाते हैं खुद ही दिल से अपने ,
किसीको कहकर अपना बनाया नही जाता ……,
इतना बस इन्हें समझाया करो ..
`
गम में हसने वालो को कभी रुलाया नहीं जाता ,
लहरों से पानी को कभी हटाया नहीं जाता ,
होने वाले हो जाते हैं खुद ही दिल से अपने ,
किसीको कहकर अपना बनाया नही जाता ……,
"निर्मोही"
जिस्म सीली लकड़ी जैसे सुलग रहा है
अपनी जली रूह की राख उड़ा कर
रुख हवाओ का दिखा रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
आज कुछ खुवाब बोए है कागज़ पर
कोशिश है नज्मो को बा - तरतीब करने की
किये जा रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
कुछ रह गया जो साथ न गया तुम्हारे
दिल की दराजों को फिर से खंगाल कर
आज वोह सामान निकाल रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
कुछ लम्हे टंगे है मेरे कमरे की दीवार पर
वक़्त की धूल सी जम गई है उन पर
उन्हे उतार रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
थोड़ी सी खताए रखी है अलमारी के ऊपर
सजाए पता नहीं कब तक आयेगी
एक ज़माने से इंतजार कर रहा हू
फिर एक नयी चिता जला रहा हू
"निर्मोही"Sunday, 4 September 2011
क्या तुमको ये
अहसास है की तुम इस
दिल के लिय कितने खास हो....
यकीन न हो तो
करीब आकर देख लेते तुम्हारे बिना
ये दिल हर पल कितना उदास है ..
वो दूर रहने वाले
इतना तो याद कर लिया होता
एक प्यार भरा पैगाम ही भिजवा दिया होता .
कैसे जीते है
तुम्हारी यादो में मर मर कर
एक बार आकर
हाल पूछ तो लिया होता ..
जल रहा है दिल ..
कभी आके इसपे आपने
शितल मोती तो बरसाया होता....
पर शायद हो न सके .
इस दिल को जलना है ...तेरी याद में ..
तेरी मोहब्बत में
"निर्मोही"
Saturday, 3 September 2011
आप ने
दिन रात मुझको सताया इतना
की आपसे नफरत भी हो गई
और मोहब्बत भी हो गई
आपने इस नजाकत से
चूमा मेरे होठो को था
की रोजा भी था टूटा और अफ्तारी भी थी हो गई ..
आपने इस तरह से
मुझसे मोहब्बत थी की गुनाह भी न
हुआ था ,और इबादत भी थी हो गई ..
मत पूछो आपके
प्यार करने का अंदाज कैसा था ...
आपने था शिद्दत से
सीने से यु लगाया ..की मौत भी न हुई
और जन्नत थी भी मिल गई.......
. ''निर्मोही"
Friday, 2 September 2011
"निर्मोही"
जिन्दगी को आज रुसवा होने का डर है...........
थमी हुई जिन्दगी में तूफान के मचल जाने का डर है.......
अभी तक तो जीने की बस कोशीस ही करते थे ....
अब हर कोशिश के नाकाम होने का डर है.......
काश कभी उनको ये चुभ न पाए.
जिनके लिय रातो में जग-जग के अपने को तरपाया............
उनके दिल को कभी इसकी आहट भी न हो पाया .........
आज जब उनको आरज़ू भी जुदा हो गई हमसे ...
खुदा करे उन्हें अब कभी शक्ल भी न दिखाये......
हम कांटे ठहरे उनके गुलशन के..
सो इस दुनिया से जुदा हो जाने का डर है .....
जैसे
"निर्मोही"
तेरी मोहब्बत में
मेरे महबूब ......सारी उम्र ,हर कदम पर मिले.
तुम्हारी मोह्हबत ,
अहसास की रंगों से महकते
जैसे सुर्ख गुलाब के फूल ....
धुप से तपती रहो में
छाये ठंढी छावं सी
जैसे पीले अमलतास के फूल .....
गोरी हथेलियों पर आके सज जाये
इन्द्रधनुषी सपने संजोये इन आँखों में
जैसे खुशरंग मेहंदी के महकते फूल.......
छनछनाती चांदनी रातो में
बिछ जाते है बिस्तर ख्वाहिशे के जैसे
महकते है बेला के खिलते फूल ......
मेरे महबूब
हर उम्र ,हर कदम पर मिले ..........
" तुम्हारी मोह्हबत के फूल"
"निर्मोही"
Sunday, 28 August 2011
मेरी रूह भी महक रही है तुम्हारी मोहब्बत से .......
मेरे महबूब ......
मोहबत के शहर की
जमी का वो टुकरा
आज भी यादो की खुसबू से महक रहा है
जहाँ
मैंने सुर्ख गुलाबो की
महकती पंखुरियो को
तुम्हारे कदमो में बिछाया था....
तुमने कहा था -
यह फूल कदमो में बिछाने के लिय नहीं है....
तुम्हारे बालो में सजाने के लिय है...
फिर तुमने
खुले बालो में
सुर्ख गुलाब लगते हुए कहा था -
आई लव यूं ...
तब से बल ही नहीं
मेरी रूह भी महक रही है
तुम्हारी मोहब्बत से .......
Saturday, 13 August 2011
दीवाना -दिल
हँवा के पारो पे लिखा है मैंने दीवाने दिल का फशाना .......................?
तुम ने पढ़ा की नहीं जाने जाना ...........................?
रूपेश "र्निमोही,,
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