मुझे आज भी यद् है
वो लम्हे
जब तुमने कहा था -
तुम्हारी नज्मे
लेवल एक नज्म नहीं है
ये तो किताबे -इश्क़ की
पाक नियामते है .....
जिन्हें मैंने आज महसूस करने लगा हूँ..
तुम्हारा हर एक लब्ज खुद ही
किसी दीवाने दिल की पाक कलामे -इलाही है..
जिसे मई एक कलमे की तरह
हमेशा पढ़ते उसमे खोते रहना चाहता हु...
'निर्मोही '


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