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कुछ तो मजबूरिय रही होगी वरना यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता.............?

Sunday, 28 August 2011

मेरे महबूब 
मुझे आज भी यद् है
वो लम्हे 
जब तुमने कहा था -
तुम्हारी नज्मे 
लेवल एक नज्म नहीं है 
ये तो किताबे -इश्क़ की 
पाक नियामते है .....
जिन्हें मैंने आज महसूस करने लगा हूँ..
तुम्हारा हर एक लब्ज खुद ही
किसी दीवाने दिल की पाक कलामे -इलाही है..
जिसे मई एक कलमे की तरह
हमेशा पढ़ते उसमे खोते रहना चाहता हु...
                                  'निर्मोही '

मेरी रूह भी महक रही है तुम्हारी मोहब्बत से .......

मेरे महबूब ......
मोहबत के शहर की 
जमी का वो टुकरा 
आज भी यादो की  खुसबू  से महक रहा है 
जहाँ 
मैंने सुर्ख गुलाबो की 
महकती पंखुरियो को 
तुम्हारे कदमो में बिछाया था....
तुमने कहा था -
यह फूल कदमो में बिछाने के लिय नहीं  है....
तुम्हारे बालो में सजाने के लिय है...
फिर तुमने 
खुले बालो में 
सुर्ख गुलाब लगते हुए कहा था -
आई लव यूं ...
तब से बल ही नहीं 
मेरी रूह भी महक रही है 
तुम्हारी मोहब्बत से .......


Saturday, 13 August 2011

nirmohi


दीवाना -दिल


हँवा के पारो पे लिखा है मैंने दीवाने दिल का फशाना .......................?
तुम ने पढ़ा की नहीं जाने जाना ...........................?
                                                     


                                                      रूपेश "र्निमोही,,