आप ने
दिन रात मुझको सताया इतना
की आपसे नफरत भी हो गई
और मोहब्बत भी हो गई
आपने इस नजाकत से
चूमा मेरे होठो को था
की रोजा भी था टूटा और अफ्तारी भी थी हो गई ..
आपने इस तरह से
मुझसे मोहब्बत थी की गुनाह भी न
हुआ था ,और इबादत भी थी हो गई ..
मत पूछो आपके
प्यार करने का अंदाज कैसा था ...
आपने था शिद्दत से
सीने से यु लगाया ..की मौत भी न हुई
और जन्नत थी भी मिल गई.......
. ''निर्मोही"


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